October 17, 2026 3:58 am

भेल में नहीं थम रही कॉपर चोरी, दो दिन में झांसी और भोपाल में दो बड़ी घटनाएं

भेल में नहीं थम रही कॉपर चोरी, दो दिन में झांसी और भोपाल में दो बड़ी घटनाएं

झांसी में एम्बुलेंस से 15 किलो से अधिक, तो भोपाल में महाप्रबंधक की कार से 25 किलो कॉपर मिलने की चर्चा; सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

भोपाल/झांसी। देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) में कॉपर चोरी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कंपनी में एक ओर काम का दबाव और उत्पादन गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर चोरी की घटनाएं कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। ताजा मामलों में झांसी और भोपाल इकाइयों में दो दिन के भीतर कॉपर चोरी की दो बड़ी घटनाएं सामने आने की जानकारी मिली है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भेल झांसी में फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर एक एम्बुलेंस की जांच के दौरान सीट के नीचे छिपाकर रखा गया 15 किलोग्राम से अधिक कॉपर बरामद किया गया। इसकी कीमत 50 हजार रुपये से अधिक बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित एम्बुलेंस चालक को इस मामले में आरोपी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि एम्बुलेंस फैक्ट्री परिसर के भीतर ओएचएस क्षेत्र में स्थित थी।

वहीं, भेल भोपाल में भी एक महाप्रबंधक की कार की डिक्की से लगभग 25 किलोग्राम कॉपर बरामद होने का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में महाप्रबंधक के चालक को आरोपी बनाए जाने की बात कही जा रही है, जबकि महाप्रबंधक को क्लीन चिट दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, मामले की जांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।

कर्मचारियों के लिए अलग और अधिकारियों के लिए अलग नियम क्यों?

भोपाल में सामने आए मामले को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि जब किसी वरिष्ठ अधिकारी की कार से चोरी का संदिग्ध सामान बरामद होता है, तो जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारी की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए। उनका सवाल है कि यदि सामान्य कर्मचारियों के मामलों में जांच पूरी होने तक निलंबन जैसी कार्रवाई की जाती है, तो वरिष्ठ अधिकारियों के मामलों में भी समान और पारदर्शी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जानी चाहिए?

हालांकि, किसी अधिकारी को निलंबित करना या उसके विरुद्ध अन्य कार्रवाई करना संबंधित तथ्यों, लागू नियमों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने से पहले निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इस पूरे मामले में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कॉपर कार तक कैसे पहुंचा, उसे किसने रखा और संबंधित व्यक्तियों की वास्तविक भूमिका क्या थी।

पहले भी लाखों रुपये के कॉपर चोरी के मामले रहे हैं चर्चा में

भेल में कॉपर चोरी का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले भी लाखों रुपये के कॉपर की चोरी से जुड़े मामले चर्चा में रहे हैं और उनकी जांच को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में झांसी और भोपाल में सामने आए ताजा मामले कंपनी के लिए चिंता का विषय हैं।

कॉपर जैसे मूल्यवान औद्योगिक कच्चे माल की चोरी से कंपनी को सीधे आर्थिक नुकसान होता है। इसके अलावा, ऐसी घटनाएं देश की प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की साख को भी प्रभावित करती हैं। यदि फैक्ट्री परिसर के भीतर से कॉपर बाहर ले जाने की घटनाएं बार-बार सामने आती हैं, तो यह सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।

विजिलेंस और सुरक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय हो

भेल परिसर में चोरी रोकने की जिम्मेदारी सुरक्षा विभाग और सतर्कता व्यवस्था की है। इसके बावजूद यदि चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, तो यह जरूरी हो जाता है कि सुरक्षा जांच, प्रवेश और निकास की निगरानी तथा संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की समीक्षा की जाए।

विशेष रूप से यह जांच होनी चाहिए कि फैक्ट्री परिसर से कॉपर बाहर ले जाने की कोशिश कैसे हुई, प्रवेश और निकास द्वारों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने क्या कार्रवाई की तथा निगरानी तंत्र में कहां चूक हुई। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जांच में किसी कर्मचारी या अधिकारी के साथ पद के आधार पर भेदभाव न हो।

कंपनी प्रबंधन से पारदर्शी जांच की मांग

भेल झांसी और भोपाल में सामने आई घटनाओं ने एक बार फिर कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब जरूरी है कि दोनों मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए, दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो तथा सुरक्षा व्यवस्था में मिली कमियों को दूर किया जाए।

कंपनी प्रबंधन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इन घटनाओं में अब तक क्या कार्रवाई हुई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। आखिर सवाल सिर्फ कॉपर की चोरी का नहीं, बल्कि भेल की संपत्ति की सुरक्षा, कंपनी को होने वाले आर्थिक नुकसान और जवाबदेही सुनिश्चित करने का भी है।

भेल की संपत्ति की सुरक्षा सर्वोपरि है। चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के साथ-साथ जांच में निष्पक्षता और सभी के लिए समान नियमों का पालन सुनिश्चित करना समय की मांग है।

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