कोल इंडिया के 2 लाख कर्मियों को ₹1.10 लाख बोनस, भेल में भी सम्मानजनक बोनस की मांग तेज
भेल सीटू महामंत्री रंजीत सिंह बोले- कर्मचारियों को उनका हक दिलाने के लिए इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ेगी सीटू
भोपाल। कोल इंडिया में दुर्गा पूजा के अवसर पर लगभग दो लाख कर्मचारियों को ₹1 लाख 10 हजार 250 रुपये का बोनस देने पर प्रबंधन और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के बीच सहमति बनने के बाद भेल में भी सम्मानजनक दिवाली बोनस की मांग तेज हो गई है। कोल इंडिया मुख्यालय कोलकाता में बोनस को लेकर प्रबंधन और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के बीच करीब आठ घंटे तक चली लंबी वार्ता के बाद समझौता हुआ। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कोयला कर्मियों को ₹7,250 अधिक बोनस मिलेगा।
कोल इंडिया में बोनस की राशि को लेकर प्रबंधन और यूनियनों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। प्रबंधन द्वारा कम राशि का प्रस्ताव दिए जाने के बाद यूनियन प्रतिनिधियों ने ₹1.20 लाख बोनस की मांग रखी। कई दौर की बातचीत और बार्गेनिंग के बाद अंततः ₹1,10,250 की राशि पर सहमति बनी। बोनस की राशि 15 अक्टूबर तक कर्मचारियों के बैंक खातों में भेजे जाने की बात कही गई है।
कोल इंडिया के इस समझौते का हवाला देते हुए भेल सीटू के महामंत्री रंजीत सिंह ने कहा कि देश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपनी मेहनत और उत्पादन के दम पर कंपनियों को मजबूत बनाया है। ऐसे में कर्मचारियों को उनके योगदान के अनुरूप सम्मानजनक बोनस मिलना उनका अधिकार है।
रंजीत सिंह ने कहा कि भेल की जेसीएम बैठकों में कुछ नेताओं की उम्र 90 से 100 वर्ष के बीच पहुंच चुकी है। यदि ऐसे वरिष्ठ नेता कोल इंडिया के कर्मचारियों के बोनस की वार्ता में शामिल होते तो शायद एक घंटे की बार्गेनिंग भी उनके लिए इस उम्र में संभव नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा भेल के हजारों मेहनतकश कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए। आज जरूरत है कि कर्मचारी हितों की लड़ाई लड़ने के लिए सक्रिय और ऊर्जावान नेतृत्व आगे आए।
उन्होंने कहा कि सीटू यूनियन इस बार भेल कर्मचारियों को सम्मानजनक दिवाली बोनस दिलाने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है। एक तरफ अधिकारी पीआरपी के नाम पर लाखों रुपये का लाभ प्राप्त कर रहे हैं, वहीं कर्मचारियों के बोनस के समय प्रबंधन की ओर से अलग-अलग कारण और बहाने बताए जाते हैं। यह दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भेल सीटू महामंत्री ने कहा कि कर्मचारियों ने कठिन परिस्थितियों में उत्पादन, गुणवत्ता और कंपनी के प्रदर्शन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए बोनस को केवल खर्च के रूप में देखने के बजाय कर्मचारियों की मेहनत और उनके योगदान के सम्मान के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि भेल कर्मचारी अपने हक और सम्मानजनक बोनस के लिए मुट्ठी बांधकर एक साथ खड़े हों। यदि कर्मचारी एकजुट होकर अपनी मांग को मजबूती से रखेंगे तो प्रबंधन पर भी सकारात्मक निर्णय लेने का दबाव बनेगा।
रंजीत सिंह ने पिछले पीपीपी समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार पीपीपी के समय कर्मचारियों को उम्मीदों के अनुरूप लाभ नहीं मिल पाया और कर्मचारियों के साथ ठगी हुई, वैसा इस बार नहीं होने दिया जाएगा। सीटू कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी और सम्मानजनक बोनस के लिए मजबूती से आवाज उठाएगी।
उन्होंने कहा कि कोल इंडिया में यूनियनों ने एकजुट होकर लंबी बातचीत और दबाव के बाद ₹1.10 लाख से अधिक का बोनस हासिल किया है। यह उदाहरण बताता है कि मजबूत सामूहिक प्रयास और एकजुटता से कर्मचारी अपने अधिकार हासिल कर सकते हैं। भेल में भी इसी एकजुटता के साथ कर्मचारियों के सम्मानजनक बोनस की लड़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा।