CISF आरक्षक पर 50 हजार रुपये लेकर कॉपर रोल कारखाने से बाहर निकलवाने का आरोप, करीब 4.72 लाख रुपये की सामग्री चोरी होने का मामला; जांच में अभी तक किसी स्थायी भेल कर्मचारी की संलिप्तता सामने नहीं आई
भोपाल | भेल न्यूज 24
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल), भोपाल के कारखाने से 525 किलोग्राम कॉपर रोल चोरी होने के मामले में गोविंदपुरा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक ठेकेदार के सुपरवाइजर और उसके दो ठेका श्रमिकों को गिरफ्तार किया है। मामले में सीआईएसएफ के एक आरक्षक की कथित संलिप्तता भी सामने आई है। दैनिक भास्कर में 29 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार के अनुसार, चोरी किए गए कॉपर रोल की कीमत करीब 4.72 लाख रुपये बताई गई है।
ठेका श्रमिकों और सुपरवाइजर पर चोरी की साजिश रचने का आरोप
प्रकाशित समाचार के मुताबिक, भेल के मेंटेनेंस स्टोर में कार्यरत सुपरवाइजर सुधीर कुमार पाल ने अपने दो साथियों धर्मेंद्र कटियार और ओमप्रकाश बंजारे के साथ मिलकर चोरी की साजिश रची थी। आरोप है कि सीआईएसएफ के एक आरक्षक को 50 हजार रुपये देकर कॉपर रोल कारखाने से बाहर निकलवाए गए। इसके बाद चोरी की गई सामग्री को मारुति-800 कार में रखकर कारखाने से बाहर ले जाया गया और बाद में कबाड़ी को बेच दिया गया।
13 अक्टूबर को हुई थी चोरी की घटना
खबर के अनुसार, 13 अक्टूबर की सुबह करीब 5 बजे सीआईएसएफ ब्लॉक नंबर-8 स्थित मटेरियल स्टोर से 21 कॉपर रोल चोरी किए गए थे। प्रत्येक रोल का वजन लगभग 25 किलोग्राम था। इस प्रकार कुल 525 किलोग्राम कॉपर रोल चोरी हुए, जिनकी कीमत करीब 4.72 लाख रुपये बताई गई है।
घटना की रिपोर्ट 24 अक्टूबर को गोविंदपुरा थाने में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर आरोपियों की भूमिका का पता लगाया।
जांच में अभी तक किसी स्थायी भेल कर्मचारी की संलिप्तता नहीं
इस मामले में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अब तक की जांच में भेल के किसी भी स्थायी (परमानेंट) कर्मचारी की संलिप्तता सामने नहीं आई है। प्रकाशित समाचार में जिन लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख है, उनमें ठेकेदार का सुपरवाइजर और उसके दो ठेका श्रमिक शामिल हैं। वहीं, सीआईएसएफ के एक आरक्षक पर भी चोरी में सहयोग करने का आरोप बताया गया है।
औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
भेल जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र के औद्योगिक प्रतिष्ठान में कीमती सामग्री की चोरी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मी की कथित संलिप्तता का मामला गंभीर है। इस घटना के बाद कारखाने के भीतर सामग्री की निगरानी, स्टोर की सुरक्षा और सामान को बाहर ले जाने की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और सामग्री के आवागमन पर प्रभावी निगरानी आवश्यक है।
नोट: यह समाचार दैनिक भास्कर में 29 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।











