बीएचईएल भोपाल में ‘सांप-सीढ़ी’ का खेल, अधिकारियों की आपसी खींचतान बनी कारखाने की प्रगति में बाधा
भोपाल।
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) भोपाल इकाई में इन दिनों अधिकारियों के बीच चल रही आपसी खींचतान और गुटबाज़ी कारखाने की उन्नति में बड़ी बाधा बनती जा रही है। एक ओर जहां बीएचईएल भोपाल के मुखिया श्री पी. के. उपाध्याय उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दिन-रात, 12 से 14 घंटे तक मेहनत कर रहे हैं, वहीं प्रबंधन के कुछ अधिकारी निजी असंतोष के चलते औद्योगिक संबंधों को कमजोर करने में लगे हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रमोशन में पीछे रह जाने से नाराज़ मानव संसाधन (HR) विभाग के कुछ अधिकारी औद्योगिक संबंधों को सुधारने के बजाय उन्हें और अधिक बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। इन अधिकारियों की कार्यशैली के कारण कारखाने में आए दिन धरना-प्रदर्शन और तनावपूर्ण माहौल बन रहा है।
स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि बीएचईएल भोपाल की प्रमुख यूनियनें अब आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रही हैं। यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो इसका सीधा असर उत्पादन, समयबद्ध परियोजनाओं और कारखाने की साख पर पड़ना तय माना जा रहा है।
एक ट्रेड यूनियन नेता ने नाम न छापने की शर्त पर BHEL News 24 को बताया कि-
“जहां बीएचईएल के मुखिया उत्पादन लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, वहीं कुछ अधिकारी जानबूझकर समस्याएं पैदा कर रहे हैं, ताकि काम आसान होने के बजाय और जटिल हो जाए।”
सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आई है कि प्रमोशन न मिलने से बेहद नाराज़ एक वरिष्ठ अधिकारी ने ठेका श्रमिकों की एक नई यूनियन को रजिस्टर कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे औद्योगिक संबंधों में और अधिक अस्थिरता पैदा हो गई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जब यह पूरा मामला बीएचईएल के कॉरपोरेट प्रबंधन तक पहुंच चुका है, तो शीर्ष प्रबंधन ऐसे अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है, जिनकी वजह से कारखाने के औद्योगिक संबंध निचले स्तर तक पहुंच चुके हैं।
बीएचईएल जैसे महारत्न सार्वजनिक उपक्रम में आंतरिक कलह और व्यक्तिगत असंतोष यदि हावी रहा, तो इसका नुकसान केवल प्रबंधन या यूनियनों को नहीं, बल्कि कारखाने की औद्योगिक क्षमता को भी उठाना पड़ेगा।
✍️ पत्रकार : Er. राघवेंद्र सिंह राजपूत की विशेष रिपोर्ट






