इंसेंटिव स्कीम रिवीजन पर हैदराबाद में सब-कमेटी बैठक, कई बिंदुओं पर नहीं बनी सहमति
बैठक के दौरान इंसेंटिव राशि में वृद्धि के मुद्दे पर यूनियनों और प्रबंधन के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए। यूनियनों, विशेषकर सीटू सहित अन्य संगठनों ने न्यूनतम ₹8,000 इंसेंटिव की मांग रखी, जबकि प्रबंधन की ओर से वर्तमान राशि पर केवल 20 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव पर इंटक और एटक की सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है, वहीं सीटू और अन्य यूनियनों ने इसका कड़ा विरोध किया।
डायरेक्ट प्रोडक्शन कर्मचारियों पर आंशिक सहमति
प्राप्त जानकारी के अनुसार डायरेक्ट प्रोडक्शन से जुड़े कर्मचारियों—जैसे क्रेन ऑपरेटर, सिलिंगर और मेंटेनेंस कर्मचारियों—को 0.8 प्वाइंट इंसेंटिव दिए जाने पर प्रबंधन और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनती दिखाई दी है।
हालांकि ड्राफ्ट्समैन एवं क्वालिटी विभाग के कर्मचारियों के मामले में प्रबंधन इस प्वाइंट को 0.8 तक बढ़ाने को तैयार नहीं हुआ। प्रबंधन केवल 0.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.65 प्रतिशत इंसेंटिव दिए जाने पर ही सहमत होता नजर आया। सीटू यूनियन ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए इसका विरोध दर्ज कराया और इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
उपस्थिति और इंडायरेक्ट वर्करों पर चर्चा
बैठक में 18 दिन की अनिवार्य उपस्थिति को घटाकर 12 दिन करने की यूनियन की मांग पर प्रबंधन ने 16 दिन तक लाने का प्रस्ताव रखा, जिस पर आगे चर्चा की संभावना बनी है। वहीं इंडायरेक्ट वर्करों के लिए इंसेंटिव प्वाइंट को 0.6 से बढ़ाकर 0.8 किए जाने पर सहमति बनने के संकेत मिले हैं।
अगली बैठक बुलाने की मांग
यूनियन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि इंसेंटिव स्कीम को जल्दबाजी में लागू न किया जाए। यूनियन का कहना है कि इस विषय पर अगली बैठक बुलाई जाए, ताकि यूनिट स्तर पर कर्मचारियों से चर्चा कर उनके सुझावों के साथ अगली बैठक में निर्णय लिया जा सके।
फिलहाल इंसेंटिव राशि में वृद्धि और कुछ श्रेणियों के प्वाइंट को लेकर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। बैठक समाप्ति की ओर बढ़ रही है और अब सभी की निगाहें अगली बैठक की तारीख की घोषणा पर टिकी हुई हैं।