October 22, 2026 1:54 pm

ज्ञापन यूनियन की छटपटाहट, भोपाल में कर्मचारी देख रहे तमाशा

ज्ञापन यूनियन की छटपटाहट, भोपाल में कर्मचारी देख रहे तमाशा

भेल न्यूज 24 |  राघवेन्द्र सिंह राजपूत की रिपोर्ट

भेल भोपाल में इन दिनों एक तथाकथित “ज्ञापन यूनियन” को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कर्मचारियों के बीच इस यूनियन की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इसे लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणियां भी सामने आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार, यह यूनियन इंसेंटिव रिवीजन की महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि इसने पिछला चुनाव एक इंडिपेंडेंट यूनियन के रूप में लड़ा था। वहीं इस बार होने वाली इंसेंटिव रिवीजन बैठक में भोपाल इकाई का दबदबा रहना तय माना जा रहा है, क्योंकि भोपाल से सीआईटीयू, बीएमएस और एचएमएस के महामंत्री इस बैठक में भाग लेने जा रहे हैं।
बैठक में शामिल न हो पाने की स्थिति में ज्ञापन यूनियन के महामंत्री द्वारा दिल्ली में अधिकारियों से मिलने का समय मांगा जा रहा है। साथ ही अधिकारियों के साथ फोटो खिंचवाकर ज्ञापन सौंपने को ही उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करते हुए मीडिया में प्रचार किया जा रहा है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभा दी है।

हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि पिछले 3 वर्ष में इस यूनियन ने न तो कोई द्वार सभा आयोजित की, न ही कोई बुलेटिन वितरित किया और न ही कर्मचारियों के हित में कोई ठोस संघर्ष किया। कर्मचारियों के अनुसार, इस यूनियन की गतिविधियां केवल अधिकारियों से समय लेकर ज्ञापन सौंपने तक ही सीमित रही हैं।
कर्मचारियों के बीच इस स्थिति को लेकर हास्य का माहौल है। उनका कहना है कि जब यूनियन स्वयं इंसेंटिव रिवीजन की बैठक में भाग नहीं ले रही है, तो श्रेय लेने की होड़ क्यों मचाई जा रही है।
इंसेंटिव रिवीजन को लेकर भोपाल इकाई में विशेष रुचि देखी जा रही है। अन्य इकाइयों की तुलना में यहां यह मुद्दा अधिक महत्वपूर्ण बना हुआ है। भेल भोपाल व झांसी इकाई को छोड़कर अधिकांश इकाइयों में ओवरटाइम भुगतान की व्यवस्था बनी हुई है, जिसके चलते वहां के यूनियन नेता उसी मांग पर केंद्रित हैं।
वहीं भोपाल में सीआईटीयू, बीएमएस और एचएमएस ने संयुक्त बैठक कर अपनी रणनीति तय कर ली है। सूत्रों के अनुसार, यदि इंसेंटिव राशि में सम्मानजनक वृद्धि नहीं होती है, तो सब कमेटी में सहमति बनना मुश्किल होगा। वहीं उचित वृद्धि की स्थिति में इंसेंटिव रिवीजन पर हस्ताक्षर संभव माने जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, भेल भोपाल में इंसेंटिव रिवीजन को लेकर जहां एक ओर गंभीर रणनीति बनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर ज्ञापन आधारित राजनीति कर्मचारियों के बीच चर्चा और हास्य का विषय बनी हुई है।

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