BHEL ने नॉर्वे की Hystar AS के साथ किया रणनीतिक समझौता, भारत में PEM इलेक्ट्रोलाइजर का होगा स्वदेशीकरण
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने नॉर्वे की कंपनी Hystar AS के साथ रणनीतिक समझौता किया है। इस समझौते के माध्यम से भारत में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए PEM (Proton Exchange Membrane) इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम का चरणबद्ध स्वदेशीकरण और स्थानीय विनिर्माण किया जाएगा।
समझौते पर BHEL की ओर से हैवी पावर इक्विपमेंट प्लांट, हैदराबाद के कार्यपालक निदेशक श्री वाई.श्रीनिवास राव तथा न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस के महाप्रबंधक एवं प्रमुख श्री सुतृप्तो डे ने हस्ताक्षर किए। Hystar AS की ओर से कंपनी के CEO श्री फ्रेडरिक मोविल ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित रॉयल नॉर्वेजियन एंबेसी के Chargé d’Affaires श्री Arvinn Eikeland Gadgil, BHEL की निदेशक (Industrial Systems & Products) सुश्री बानी वर्मा, निदेशक (Engineering, Research & Development) श्री एस.एम. रामनाथन सहित BHEL एवं Hystar के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि BHEL ने इसी वर्ष की शुरुआत में thyssenkrupp nucera India Private Limited के साथ alkaline electrolyser systems के लिए रणनीतिक समझौता किया था। अब Hystar AS के साथ PEM इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम के क्षेत्र में हुए इस सहयोग से BHEL भारत की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गया है, जो alkaline और PEM—दोनों प्रकार के इलेक्ट्रोलाइजर समाधान उपलब्ध कराने की क्षमता रखती हैं।
यह रणनीतिक साझेदारी भारत में तेजी से विकसित हो रहे ग्रीन हाइड्रोजन बाजार के लिए BHEL की तकनीकी एवं परियोजना क्रियान्वयन क्षमता को और मजबूत करेगी। साथ ही, PEM इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक के चरणबद्ध स्वदेशीकरण से देश में स्थानीय विनिर्माण, तकनीकी क्षमता विकास और ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
BHEL का यह कदम केंद्र सरकार के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा विकल्प के रूप में विकसित करने में इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है।
BHEL के लिए यह समझौता कंपनी के पारंपरिक ऊर्जा उपकरणों से आगे बढ़ते हुए नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।